Get in Touch
नींद: हमारी दैनिक दिनचर्या में नींद एक प्राकृतिक और आवश्यक भाग है, यह हमको उर्जा प्रदान करती है | नींद एक जटिल जैविक प्रक्रिया और अवस्था है जिसके दौरान मस्तिष्क की सक्रियता बदलती रहती है जो कि स्वस्थ जीवन जीने के लिए आव्यशक है। गहरी व सही मात्रा में ली गई नींद हमारे मन व शरीर को संपूर्ण विश्राम देती है जिससे हम को ताजगी मिलती है, हम ऊर्जावान तथा प्रसन्न हो जाते हैं और नई जानकारी रिफ्रेश करने में सहायता करती है |

नींद एक जटिल जैविक प्रक्रिया और अवस्था है जिसके दौरान मस्तिष्क की सक्रियता बदलती रहती है जो कि स्वस्थ जीवन जीने के लिए आव्यशक है। गहरी व सही मात्रा में ली गई नींद हमारे मन व शरीर को संपूर्ण विश्राम देती है जिससे हम को ताजगी मिलती है, हम ऊर्जावान तथा प्रसन्न हो जाते हैं और नई जानकारी रिफ्रेश करने में सहायता करती है |

नींद के दौरान मस्तिष्क 5 विशिष्ट स्तर में घूमता है (Wakefulness, NREM Stages: N1, N2, N3 & REM Stage)

नींद का हर स्तर महत्वपूर्ण होता है, जिसमें मन और शरीर को पूरी तरह आराम मिलता है |

कुछ स्तरो में लोग आराम और ऊर्जावान महसूस करते हैं जबकि अन्य स्तरो में सीखने व याद करने में मदद मिलती है | अच्छी नींद के दौरान शरीर में कुछ हारमोंस बनते है जो पूरे जीवन में मांसपेशियों के निर्माण में मदद करते है और शरीर को नुकसान होने से बचाते है | नींद पढ़ने, सीखने और समझने में मदद करता है |

  • नींद की कमी, सीखने और समझने की समस्याओं को बढ़ाती है उससे लंबे समय में हमारे स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है |
  • नींद की कमी दैनिक कार्य, मूड और स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है | अगर 1 घंटे कम नींद लेते हैं तो अगले दिन ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होती है | आप का रिस्पांस टाइम बढ़ सकता है , यह आपके मूड को भी प्रभावित करती है |
  • कम नींद के कारण चिड़चिड़ापन आ सकता है, खासकर बच्चों और किशोरों के लिए जो लोग नींद पर्याप्त नहीं लेते वह निराश हो सकते हैं |
  • अच्छी नींद की कमी उच्च रक्तचाप हृदय रोग और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ाता है

नींद का पैटर्न दो प्रक्रियाओं के साथ मिलकर काम करता है– नींद की ड्राइव और साकेडियन घड़ी |

  • नींद की जरूरत, आपके जागते समय की लंबाई (साकेडियन घड़ी) से प्रेरित होती है, जितना ज्यादा आप जागते है उतना ज्यादा आपको नींद की जरूरत होती है|
  • नींद की ड्राइव आपके शरीर में तब तक बनी रहती है जब तक आप सो नहीं जाते

नींद दो तरह के होते हैं

  • नॉन रैपिड आई मूवमेंट (NREM)
  • रैपिड आई मूवमेंट (REM) और

नॉन रैपिड आई मूवमेंट (NREM) – इसमें दिमाग शांत रहता है, हमारा शरीर चल फिर सकता है | इस अवस्था में कुछ हारमोंस बनते हैं, जिससे हमारा शरीर दिन भर की टूटफूट की मरम्मत करता है | इस अवस्था के भी 4 भाग होते हैं

  • पूर्व नींद (Wakefullness) में मांसपेशियां ढीली हो जाती है, हृदय गति धीमी हो जाती है और शरीर का तापमान कम हो जाता है
  • हल्की नींद (N1) इस समय तक आपको बिना किसी परेशानी के आसानी से जगाया जा सकता है
  • मंद तरंग नींद (N2) इस अवस्था में हमारे खून का प्रव|ह कम हो जाता है इसमें नींद में बोलने और चलने की क्रियाएं हो सकती है
  • अति मंद तरंग नींद (N3) इस अवस्था में आपको जगाना बहुत कठिन होता है और इस समय आपको कोई जगा दे तो आपको बहुत अजीब सा महसूस करते हैं

रैपिड आई मूवमेंट (REM) – यह नींद की लगभग पांचवी अवस्था होती है जिसमें दिमाग बहुत सक्रिय होता है आंखें तेजी से हरकत करती रहती है और हम इस अवस्था में सपने देखते हैं हमारी मांसपेशियां बहुत ढीली रहती है |

स्लीप एपनिया (Sleep Apnea): स्वास्थ संबंधी बीमारी में स्लीप एपनिया एक आम बीमारी है| यह कई प्रकार के होते हैं इसमें सबसे प्रमुख ओ एस ए (OSA) है | इससे ग्रसित लोग तेज खर्राटे लेते हैं और वायु के प्रभाव में अवरोध होता है | कई बार श्वास बंद हो जाती है | नींद के दौरान, अवरोध और सांस का बंद होना 100 से ज्यादा भी हो सकता है} 10 या इससे ज्यादा सेकंड की अवरोध को एक घटना माना जाता है, इसकी वजह से शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम मिलती है और नींद बार-बार खुलती रहती है | मस्तिष्क इस घटनाक्रम को जीवन के लिए घातक समझता है शरीर को इससे लड़ने के लिए तैयार करता है |रात को शरीर में आराम मिलने के बजाय शरीर के सारे आंतरिक अंग ज्यादा काम करते हैं, जिससे शरीर में थकावट महसूस होती है |

इस बीमारी में रात में तेज खर्राटे आना, सांस का रुकना, दम घुटना, बार बार बाथरूम जाना इत्यादि शामिल है | ऐसे व्यक्ति दिन में अत्यधिक थकान महसूस करते हैं | सुबह उठते ही सिर दर्द होने लगता है |

इसका सही उपचार नहीं करवाने पर कई घातक और जानलेवा बीमारियों की संभावना बढ़ जाती हैजैसे हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह. मस्तिष्क का स्ट्रोक, स्मरण का कम होना, इत्यादि शामिल है |

इसके उपचार के लिए नींद के विश्लेषण की जरूरत होती है जो घर या अस्पताल में किया जा सकता है जांच के सकारात्मक होने पर सी पाइप मशीन का उपयोग करना होता है

स्लीप एपनिया (Sleep Apnea):

स्लीप एपनिया एक सामान्य शारीरिक विकार है जो सोते वक्त सांस रुकने और बारबार करवटें बदलने जैसी समस्याएं उत्पन्न कर देता है | आमतौर पर स्लीप एपनिया तब होता है जब सोते समय किसी व्यक्ति के सांस रुकने लगते हैं इसमें सांस कुछ सेकंड से कुछ मिनट तक भी रुक सकता है यह 1 घंटे में 30 या उससे ज्यादा बार भी हो सकता है |

प्रतिरोधी स्लीप एपनिया (OSA- Obstructive Sleep Apnea)

स्लीप एपनिया का सबसे आम प्रकार प्रतिरोधी स्लीप एपनिया है जो नींद के दौरान श्वांस मार्गर्बंद होने के कारण होता है | इसमें सोने के कुछ समय बाद सामान्य सांसों में खराटे या घुटन जैसी आवाज आने लगती है|

प्रतिरोधी स्लीप एपनिया (OSA) के लक्षण है :

  • जोर से खर्राटे लेना नींद के दौरान स्वास की समाप्ति
  • अचानक जागना सांसों की कमी सुबह उठने पर मुंह सुखा रहना
  • गले में खराश
  • सुबह सिर दर्द
  • अनिद्रा
  • हाइपरसोम्निया
  • याददाश्त की कमी
  • चिड़चिड़ापन

OSA से पीड़ित लोग जोरजोर से खराटे मारते हैं लेकिन हर किसी को खराटे मारने की समस्या नहीं होती है |

यह संभव है, कि स्लीप एपनिया में कोई शारीरिक लक्षण किसी को नहीं दिखता है |

प्रतिरोधी स्लीप एपनिया (OSA) निम्नलिखित परिस्थितियों में संभावना बढ़ जाती है :

  • अधिक वजन
  • मोटा गर्दन
  • संकुचित वायु मार्ग
  • 45 के बाद पुरुषों में संभावना बहुत अधिक हो जाती है
  • वंशानुगत
  • अल्कोहल का सेवन
  • धूम्रपान
  • नाक व ह्रदय विकार
  • मादक
  • दर्द दवाएं
  • आघात

प्रतिरोधी स्लीप एपनिया (OSA) की समस्याओं का अगर उपचार नहीं किया जाता है तो उसके कारण निम्न परेशानियां सकती है :

  • दिन में थकान
  • उच्च रक्तचाप
  • हार्ट अटैक
  • मधुमेह टाइप 2
  • अपच की समस्या
  • जिगर की समस्याएं

सेंट्रल स्लीप एपनिया (CSA-Central Sleep Apnea) :

सेंट्रल स्लीप एपनिया नींद का एक ऐसा विकार है जिसमें नींद के दौरान सांस 10 सेकंड या उससे ज्यादा समय के लिए बंद हो जाती है | इसमें सोते समय, मस्तिष्क कुछ समय के लिए मांस पेशियों को सांस लेने के लिए आदेश नहीं देता है | सेंट्रल स्लीप एपनिया वाले लोगों के वायु मार्ग में रुकावट नहीं होती है बल्कि मस्तिष्क और मांस पेशियों के बीच का नियंत्रण नहीं हो पाता है और सांस बंद हो जाती है |

एक अनुमान के अनुसार सभी एपनिया के मामलों में सेंट्रल स्लीप एपनिया 20% तक होती है

मिक्स्ड स्लीप एपनिया (MA- Mixed Apnea):

एपनिया का एक ऐसा प्रकार है जिसमें ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया और सेंट्रल स्लीप एपनिया दोनों के लक्षण मौजूद होते हैं

मोटापे की वजह से ऑक्सीजन की कमी (OHS- Obesity Hypoventilation Syndrome):

मोटापे की वजह से शरीर में ऑक्सीजन की कमी और कार्बन डाइऑक्साइड का बढ़ना इस बीमारी में देखा जाता है | अत्याधिक वजन के कारण व्यक्ति पर्याप्त मात्रा में सांस नहीं ले पाता और इसके परिणाम स्वरूप ऑक्सीजन की कमी हो जाती है | ऐसे ज्यादातर लोग मोटापे से पीड़ित होते हैं उनमे OSA के सारे लक्षण मौजूद होते हैं।

OHS इसके प्रमुख लक्षण है

  • हार्ट से संबंधित बीमारी
  • दिन में थकान
  • अनिद्रा
  • याददाश्त की कमी
  • चिड़चिड़ापन

ओवरलैप सिंड्रोम (Overlap Syndrome) 

सीओपीडी के साथ साथ कई तरह की अन्य दीर्घकालीन बीमारियां जुड़ जाती है जैसे:

  • अस्थमा – COPD (ACOS),
  • COPD-OSA (OCOS),
  • फाइवरोसिस-COPD (FCOS),
  • बोकाइटिस-COPD (BCOS)

ओवरलैप सिंड्रोम जीवन के लिए अत्यधिक गंभीर होती है सही समय पर जांच कराना।

उपचार

इसमें ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और बॉय लेवल का इस्तेमाल दवाओं के साथ प्रमुख है।

 

सी.ओ.पी.डी. (COPD- Chronic Obstructive Pulmonary Disease): सी.ओ.पी.डी. फेफड़े की गंभीर बीमारी है, इसमें सांस की नली सिकुड़ जाती है, और उसमें सूजन आ जाती है | यह सूजन निरंतर बढ़ती जाती है, सीओपीडी को आम बोलचाल की भाषा में क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस या फेफड़े की बीमारी भी कहते हैं यह एक जानलेवा बीमारी है

इसका प्रमुख कारण धूम्रपान होता है, धूम्रपान के द्वारा विषाक्त पदार्थ फेफड़ों की कोशिकाएं को सही तरीके से काम क काम करने नहीं देता है और ब्लड में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है | शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने वाले छोटे छोटे वायु तंत्रों में गड़बड़ी आने से सांस लेने में तकलीफ होने लगता है या फेफड़ों में संक्रमण भी फैलाता है | इस दौरान फेफड़े में लगातार कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ जाती है और उम्र के साथ यह बीमारी घातक होती जाती है

धूम्रपान इस बीमारी की प्रमुख वजह है लगातार होने वाली खांसी इसका प्रमुख लक्षण है सर्दियों में खांसी होना एक आम बात है लेकिन लंबे समय तक खांसी अगर आपका पीछा नहीं छोड़ती है तो आपको डॉक्टर से तुरंत सलाह लेना चाहिए |

सीओपीडी के प्राथमिक लक्षणों की पहचान करना बहुत आसान है अगर बलगम वाली खांसी लगातार 2 महीने से अधिक रहती है और मौसम बदलने पर भी पिछले 2 साल से ऐसा हो रहा है तो आपको सामान्य सिरप और दवाओं से आराम नहीं मिलता है | ज्यादातर मामलों में सीओपीडी के लक्षण 35 साल के बाद ही पता चलता है,

सीओपीडी का सबसे बड़ा कारण धूम्रपान है लेकिन 20% रोगी ऐसे होते हैं जो धुएं और प्रदूषित वातावरण में रहने के कारण इस रोग से ग्रसित हो जाते हैं

सीओपीडी दो प्रकार के होते हैं

  • एमफीसीमा और
  • क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस

सीओपीडी के प्रमुख लक्षण:

  • लंबे समय तक लगातार होने वाली खांसी
  • सर्दियों में खांसी होना और बलगम बनना
  • कार्य करते हुए सांस फूलना

सीओपीडी की जांच और उपचार:

सीओपीडी की प्रारंभिक अवस्था में तभी पता चलता है जब इसकी जांच स्पाइरोमीटर से करते हैं | प्रारंभिक अवस्था में सीओपीडी का पता लगने पर इसका इलाज संभव है, लेकिन अगर बहुत बढ जाने के बाद इसका पता चलता है तो उस समय लाइलाज बीमारी हो जाती हैं |  

इसे ठीक नहीं किया जा सकता बल्कि इसे सिर्फ कम कर सकते हैं |

उपचार

बा य पै प मशीन का उपयोग, उपचार में किया जाता है इसके साथसाथ ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का भी उपयोग होता है |

बा य पै प  छोटी एक मशीन है जो हवा को दो अलग अलग प्रेशर के माध्यम से मरीज के सांस लेने की प्रक्रिया को सरल और आसान बनाती है | मशीन, हवा और ऑक्सीजन के मिश्रण को मास्क की मदद से अधिक प्रवाह से सांस लेने में मदद करती है |  इस माध्यम से जरूरत के अनुपात में हवा और ऑक्सीजन की मात्रा दी जाती है, और कार्बन डाइऑक्साइड को फेफड़ों से बाहर निकाला जाता है

यह प्रक्रिया सामान्य सांस लेने की प्रक्रिया के साथ ही होती है और रोगी मशीन के साथ आराम से सोता है | मशीन के उपयोग करने पर मरीज के फेफड़ों को आराम मिलता है और और उसकी थकान कम हो जाती है |

फेफड़े की अवरोधक बीमारी (Restrictive lung disease):

यह एक दीर्घकालीन फेफड़े की ऐसी बीमारी है, जिसमे सांस लेने के दौरान फेफड़े पूरी तरह से फ़ैल नहीं पाते है , इसके परिणाम स्वरूप हवा और ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा फेफड़े में नहीं पहुंच पाती है । ऐसी बीमारी में निरंतर ऑक्सीजन की कमी रहती, और इस कमी को पूरा करने के लिए, रोगी तेजी से सांस लेता है।

ज्यादातर RLD में समय के साथ साथ रोगी की हालत खराब होती जाती है ।

सामान्यतया बीमारी दो प्रकार की होती है:

(1) आंतरिक कार्य से होने वाली फेफड़े की अवरोधक बीमारी: यह ज्यादातर आंतरिक सूजन और जकड़न की वजह से होती है।

इसके अंतर्गत आने वाले प्रमुख बीमारी हैं –

  • निमोनिया
  • ट्यूबरक्लोसिस
  • सारकोटोसिस
  • फाइब्रोसिस
  • फेफड़े का कैंसर
  • फेफड़े का अर्थराइटिसइत्यादि।

(2) बाहरी कारणों से होने वाली फेफड़े की अवरोधक बीमारी: यह ज्यादातर फेफड़े के ऊतकों और अंगों के विकार से होता है, जिसमें प्रमुख हैं, मस्तिष्क का सांस के मांसपेशियों पर कम नियंत्रण। ज्यादातर बीमारियों में फेफड़े के ऊतकों का कमजोर होना और सीने का जकड़न प्रमुख है।

इसकी प्रमुख बीमारियां हैं:

  • ऊतकों और फेफड़ों बीच में पानी आना
  • कुबडापन
  • फेफड़े और मांसपेशियों का कमजोर होना
  • मोटापे की वजह से डाईफार्म का कम काम करना
  • सीने की हड्डी का टूटनाइत्यादि

ऑक्सीजन थेरेपी:

समानत: हमारे शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा को पूरा करने का काम फेफड़ों का होता है |

ऑक्सीजन हमारे शरीर में रक्त के द्वारा पहुंचाई जाती है, सांस के द्वारा ऑक्सीजन फेफड़े की बहुत सारी वायु थैलियों में पहुंचती है, वहां से यह रक्त धमनियों के द्वारा हॉट तक पहुंचती है | हॉट इसे शरीर के विभिन्न अंगों तक पंप करता है |

सीओ पीडी में फेफड़े की रचनाएं क्षतिग्रस्त हो जाती है, और फेफड़ा हवा से पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन लेने में सक्षम नहीं होते हैं |

ऑक्सीजन थेरेपी फेफड़े में अतिरिक्त आंक्सीजन पहुंचता हैं, ताकि सही मात्रा में शरीर को ऑक्सीजन मिलती रहे और हमें सांस लेने में आसानी हो | ऑक्सीजन थेरेपी की आवश्यकता का पता लगाने के लिए डॉक्टर आपके रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा को मापने के लिए धमनी रक्त गैस परीक्षण (ABG) करवाता है |

ऑक्सीजन थेरेपी और इसके साथसाथ बायलेवल का प्रयोग, सीओपीडी को ठीक नहीं करता, उसे नियंत्रित करता है |